“..इस वर्ष घर आया स्कूल..”
कल तक घर से जाते थे स्कूल,
इस वर्ष देखो स्कूल ख़ुद मेरे घर आया ॥
माना इस स्कूल का रूप नया है,
रोज़मर्रा का जीवन कुछ बदल गया है ।
अब ना ही वो घंटी सुनाई देती है,
अब ना तो बच्चों की पंक्ति दिखाई देती है ॥
सुबह सुबह की प्रार्थना से जब,
स्कूल पूरा गूंज उठता था ।
बच्चों की किलकारी से तब,
स्कूल भी बोल उठता था ॥
हाँ अलग है, पर इस नए रूप में भी,
स्कूल की गरिमा बरकरार है ।
कक्षाएँ ज़रूर आज ख़ाली हैं,
लेकिन कम्प्यूटर पर भरमार है ॥
इंटरनेट के इस ज़माने ने,
बच्चों और शिक्षकों को फिर मिलाया ।
कल तक घर से जाते थे स्कूल,
इस वर्ष देखो स्कूल ख़ुद मेरे घर आया ॥
इस वर्ष स्कूल घर आया ॥
- अनुज प्रकाश गौतम
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