Monday, September 21, 2020

क़ैद

 ...क़ैद...


सन्नाटा पसरा है हर जगह,

     एक डर का माहौल सा छाया है 

भले क़ैद हूँ मैं आज यहाँ,

     पर हौसला ना मैंने गँवाया है 


दूर हूँ जिन अपनों से मैं,

    ये दूरियाँ भी मिट जाएँगीं 

चल दिया हूँ ऐसे सफ़र पर मैं,

    ये मज़बूरीयाँ भी सिमट जाएँगीं 


मेरे अपने हैं साथ मेरे,

    उस साथ ने इस डर को भगाया है 

भले क़ैद हूँ मैं आज यहाँ,

    पर हौसला ना मैंने गँवाया है 


जानता हूँ इस बात को मैं,

     कि वक़्त एक सा ना रहता सदा 

दर्द दे रहा जो आज मुझे,

     हो जाएगा वो दर्द भी जुदा 


बस सब्र रखना है ज़रा ज़रा,

     सतर्कता को आज मैंने अपनाया है 

हाँभले क़ैद हूँ मैं आज यहाँ,

     पर हौसला ना मैंने गँवाया है 

     पर हौसला ना मैंने गँवाया है 


  • A. Prakash

Sunday, September 13, 2020

इस वर्ष घर आया स्कूल

“..इस वर्ष घर आया स्कूल..”

वक़्त ने कुछ ऐसा खेल दिखाया,
       सभी पर पड़ी समय की काया 

कल तक घर से जाते थे स्कूल,

       इस वर्ष देखो स्कूल ख़ुद मेरे घर आया 


माना इस स्कूल का रूप नया है,

       रोज़मर्रा का जीवन कुछ बदल गया है 

अब ना ही वो घंटी सुनाई देती है,

       अब ना तो बच्चों की पंक्ति दिखाई देती है 


सुबह सुबह की प्रार्थना से जब,

             स्कूल पूरा गूंज उठता था 

बच्चों की किलकारी से तब,

            स्कूल भी बोल उठता था 


हाँ अलग हैपर इस नए रूप में भी,

            स्कूल की गरिमा बरकरार है 

कक्षाएँ ज़रूर आज ख़ाली हैं,

        लेकिन कम्प्यूटर पर भरमार है 


इंटरनेट के इस ज़माने ने,

       बच्चों और शिक्षकों को फिर मिलाया 

कल तक घर से जाते थे स्कूल,

       इस वर्ष देखो स्कूल ख़ुद मेरे घर आया 

       इस वर्ष स्कूल घर आया 


                                - अनुज प्रकाश गौतम 

Saturday, September 5, 2020

... गुरु ही हर युग में महान है ...

 * गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु र्गुरुर्देवो महेश्वर:

गुरु साक्षात परब्रह्मा तस्मै श्रीगुरवे नमः *


जन्म लिया मानव  का  है,

     मानव  रूप  में  स्वयं  भगवान्  है ..

त्रेता  युग  हो  या  हो  कल  युग ,

     गुरु  ही  हर  युग  में  महान  है ..


मुझको  ज्ञान  का  पाठ पढ़ाया ,

     जीवन  चक्र  का  राज़  बताया ..

इस  नासमझ  नादान  को ,

     गुरु  ने  ही  तो  बुद्धिमान  बनाया ..


गुरु  ना   होते  तो  बोलो  मैं ,

     कैसे  खुद  को  पहचान  पाता  ..

गुरु  ना  होते  तो  भला  मैं ,

     अपनी  पहचान  कैसे  बनाता ..


गुरु  की  दी  हुई  शिक्षा  से  ही ,

     जीवन  ये  साकार  हुआ ..

गुरु  की  उस  डाँट  से  ही  तो ,

     मेरा  जग-जीवन  उद्धार   हुआ ..


इस  सम्पूर्ण  जग  के   अँधेरे  को ,

     गुरु  की  वाणी  ने  दूर  किया ..

सूर्य  के   तेज़  सा  जिसका  तेज़  है ,

     उस  गुरु  को  मेरा  प्रणाम  है ..


जन्म  लिया  मानव  का  है ,

     पर  मानव  रूप  में  स्वयं  भगवान्  है ..

त्रेता  युग  हो  या  हो  कल  युग ,

     गुरु  ही  हर  युग  में  महान  है ..

     गुरु  ही  हर  युग  में  महान  है ..


                                    - A. Prakash

क़ैद

  ... क़ैद ... सन्नाटा   पसरा   है   हर   जगह ,      एक   डर   का   माहौल   सा   छाया   है   । भले   क़ैद   हूँ   मैं   आज   यहाँ ,      पर ...