...क़ैद...
सन्नाटा पसरा है हर जगह,
एक डर का माहौल सा छाया है ।
भले क़ैद हूँ मैं आज यहाँ,
पर हौसला ना मैंने गँवाया है ॥
दूर हूँ जिन अपनों से मैं,
ये दूरियाँ भी मिट जाएँगीं ।
चल दिया हूँ ऐसे सफ़र पर मैं,
ये मज़बूरीयाँ भी सिमट जाएँगीं ॥
मेरे अपने हैं साथ मेरे,
उस साथ ने इस डर को भगाया है ।
भले क़ैद हूँ मैं आज यहाँ,
पर हौसला ना मैंने गँवाया है ॥
जानता हूँ इस बात को मैं,
कि वक़्त एक सा ना रहता सदा ।
दर्द दे रहा जो आज मुझे,
हो जाएगा वो दर्द भी जुदा ॥
बस सब्र रखना है ज़रा ज़रा,
सतर्कता को आज मैंने अपनाया है ।
हाँ, भले क़ैद हूँ मैं आज यहाँ,
पर हौसला ना मैंने गँवाया है ॥
पर हौसला ना मैंने गँवाया है ॥
- A. Prakash