* गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु र्गुरुर्देवो महेश्वर:
गुरु साक्षात परब्रह्मा तस्मै श्रीगुरवे नमः *
जन्म लिया मानव का है,
मानव रूप में स्वयं भगवान् है ..
त्रेता युग हो या हो कल युग ,
गुरु ही हर युग में महान है ..
मुझको ज्ञान का पाठ पढ़ाया ,
जीवन चक्र का राज़ बताया ..
इस नासमझ नादान को ,
गुरु ने ही तो बुद्धिमान बनाया ..
गुरु ना होते तो बोलो मैं ,
कैसे खुद को पहचान पाता ..
गुरु ना होते तो भला मैं ,
अपनी पहचान कैसे बनाता ..
गुरु की दी हुई शिक्षा से ही ,
जीवन ये साकार हुआ ..
गुरु की उस डाँट से ही तो ,
मेरा जग-जीवन उद्धार हुआ ..
इस सम्पूर्ण जग के अँधेरे को ,
गुरु की वाणी ने दूर किया ..
सूर्य के तेज़ सा जिसका तेज़ है ,
उस गुरु को मेरा प्रणाम है ..
जन्म लिया मानव का है ,
पर मानव रूप में स्वयं भगवान् है ..
त्रेता युग हो या हो कल युग ,
गुरु ही हर युग में महान है ..
गुरु ही हर युग में महान है ..
- A. Prakash
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