Thursday, July 2, 2015

...NAARI...

.. नारी ..


हाथ जोड़ कर खड़ा हुआ मैं,
          नमन है तेरे सम्मान को ।
तेरी शीतलता को ए-नारी,
          नमन है तेरे बलिदान को ।।


कोमल है पर कमजोर नहीं,
          दुनिया को तूने बताया है ।
अपनी शक्ति, अपना विश्वास,
          दुनिया को तूने दिखाया है ।।


सदियों से अपमान सहे हैं,
          ये तो हम सब जानते हैं ।
पर अब तेरी दया-करुणा को,
         तेरी शक्ति को हम पहचानते हैं ।।


जग को जीवन देने वाली,
           मौत भी तुझसे हारी है ।
इस देश की, इस दुनिया की तू,
           सशक्त, समृद्ध, सत्कारी है ।।



                                -- A. Prakash

Monday, April 6, 2015

"...MAA..."

----- " माँ " -----

    ऐ माँ तेरी याद मुझे,
          सबसे ज्यादा रुलाती है ।
    क्यों तू इतनी दूर चली गई,
          कि तेरी आवाज भी ना अब आती है ॥


    बता भी क्या जल्दी थी तुझे,
                यूँ मुझसे दूर जाने की ।
    बता भी क्या जल्दी थी तुझे,
               यूँ मुझसे रूठ जाने की ॥


    तू तो कहती थी मुझसे ,
           बेटा तू ही मेरा प्यार है ।
    तू तो कहती थी मुझसे,
           बेटा तू ही मेरा राजकुमार है ॥


    फिर क्यों इस राजकुमार को,
                     तू अकेला छोड़ गई ।
    क्या मजबूरी थी तेरी ओ माँ,
            जो तू मुझसे मुँह मोड़ गई ।।


    अब कौन मुझे रातों में,
                लोरी गा कर सुलाएगा ।
    बता कौन अब मेरी नादानी पर,
                मंद ही मंद मुस्काएगा ।।


    माँ तूने ये भी ना सोचा,
          तुझ बिन मेरा क्या होना है ।
    तेरे लहराते आँचल के बिना,
          जीवन भर मुझे बस रोना है ।।


    माँ के आँचल के बिना,
          बता कौन सुखी रह पाया है ।
    माँ की ममता के आगे,
        बता किसका प्यार टिक पाया है ।।   


    तेरी आँखों के इस तारे से,
           देख आँसूओं की धारा बहती है ।
    आ भी जा उस दुनिया से ओ माँ,
            जिस दुनिया में तू अब रहती है ।।
            जिस दुनिया में तू अब रहती है ।।

                                          by- अनुज प्रकाश गौतम

क़ैद

  ... क़ैद ... सन्नाटा   पसरा   है   हर   जगह ,      एक   डर   का   माहौल   सा   छाया   है   । भले   क़ैद   हूँ   मैं   आज   यहाँ ,      पर ...