Wednesday, April 16, 2014

" ..Jaativaad.. "

नज़ारा देखकर आज जैसा,
      मैं थोड़ा हैरान हो गया ।

जातिवाद की इस भावना से,
      मैं थोड़ा परेशान हो गया ।।


कई पीड़ियों से हम इसमें जी रहें हैं,
     सदियों से हम ये ज़हर पी रहें हैं ।
पर कोई नहीं सुनता आस हमारी,                                                                                                        कोई नहीं बुझाता ये प्यास हमारी ।।

गाँव-गाँव और गली-गली में,
              हर जगह बस यही नज़ारा है ।
पिछड़े, परंपरा के नाम पर दब रहे,
             हमको ना किसी का सहारा है ।।

एक उम्मीद है हमारी आँखों में, 
           कि कल एक नया सवेरा होगा ।
पढ़-लिखकर हम भी आगे बड़ेंगे, 
          मेरी खुशी पर हक् सिफॆ मेरा होगा ।।

पर लगता है कभी कभी ऐसा भी,
     ये खुशी तो बस एक सपना है ।
इस जातिवाद के खौफ़ के कारण,
     सब गैर हैं, ना कोई अपना है ।।

किसी सवर्ण के साथ बैठने से, 
        मैं आज भी बहुत घबराता हूँ ।
पढ़ाई तो करी है आगे बड़ने की,
       पर अभी भी "पिछड़ा" कहलाता हूँ ।।

आखिर कारण है क्या,
     जो आज भी मुझे लोग अपनाते नहीं ।
एक ही गाँव में रहते हैं हम,
     फिर भी साथ मुझे बैठाते नहीं ।।

क्यों आज भी कुछ जगहों पर,
           मंदिर मैं नहीं जा पाता हूँ ।
क्यों कुछ नदियों-तालाबों से,
           अपनी प्यास नहीं बुझा पाता हूँ ।।

समय तो बीत रहा है तेजी से,
          और आगे भी ये गतिवान रहेगा ।
पर कब उस बदलाव की घड़ी आएगी,
         जब हमें इंसान होने का सम्मान मिलेगा ।।

ना जाने कितने सपने टूटे हैं,
        कितनी आँसुओं कि नदियाँ बह गईं ।
सोच तो बदली है इस नई पीढ़ी की,
           पर अभी भी कई कमीयाँ रह गईं ।।

उम्मीद है ये नए "आज" की सोच,
        जातिवाद की सरहदें तोड़ देगी ।
पिछड़े और सवॆणों
 की ये परंपरा,

               नई पीढ़ी पीछे छोड़ देगी ।।

यदी ये उम्मीद सम्पूर्ण हो जाए,
         तो जीवन में ना जाति-भाव रहेगा ।
सब साथ रहेंगे, साथ बैठेंगे,
         और ना किसी से कोई भेदभाव रहेगा ।।
                                       
                                                       --- A. P. Gautam

क़ैद

  ... क़ैद ... सन्नाटा   पसरा   है   हर   जगह ,      एक   डर   का   माहौल   सा   छाया   है   । भले   क़ैद   हूँ   मैं   आज   यहाँ ,      पर ...