----- " माँ " -----
ऐ माँ तेरी याद मुझे,
सबसे ज्यादा रुलाती है ।
क्यों तू इतनी दूर चली गई,
कि तेरी आवाज भी ना अब आती है ॥
क्यों तू इतनी दूर चली गई,
कि तेरी आवाज भी ना अब आती है ॥
बता भी क्या जल्दी थी तुझे,
यूँ मुझसे दूर जाने की ।
यूँ मुझसे दूर जाने की ।
बता भी क्या जल्दी थी तुझे,
यूँ मुझसे रूठ जाने की ॥
यूँ मुझसे रूठ जाने की ॥
तू तो कहती थी मुझसे ,
बेटा तू ही मेरा प्यार है ।
बेटा तू ही मेरा प्यार है ।
तू तो कहती थी मुझसे,
बेटा तू ही मेरा राजकुमार है ॥
बेटा तू ही मेरा राजकुमार है ॥
फिर क्यों इस राजकुमार को,
तू अकेला छोड़ गई ।
तू अकेला छोड़ गई ।
क्या मजबूरी थी तेरी ओ माँ,
जो तू मुझसे मुँह मोड़ गई ।।
जो तू मुझसे मुँह मोड़ गई ।।
अब कौन मुझे रातों में,
लोरी गा कर सुलाएगा ।
लोरी गा कर सुलाएगा ।
बता कौन अब मेरी नादानी पर,
मंद ही मंद मुस्काएगा ।।
मंद ही मंद मुस्काएगा ।।
माँ तूने ये भी ना सोचा,
तुझ बिन मेरा क्या होना है ।
तुझ बिन मेरा क्या होना है ।
तेरे लहराते आँचल के बिना,
जीवन भर मुझे बस रोना है ।।
जीवन भर मुझे बस रोना है ।।
माँ के आँचल के बिना,
बता कौन सुखी रह पाया है ।
बता कौन सुखी रह पाया है ।
माँ की ममता के आगे,
बता किसका प्यार टिक पाया है ।।
बता किसका प्यार टिक पाया है ।।
तेरी आँखों के इस तारे से,
देख आँसूओं की धारा बहती है ।
देख आँसूओं की धारा बहती है ।
आ भी जा उस दुनिया से ओ माँ,
जिस दुनिया में तू अब रहती है ।।
जिस दुनिया में तू अब रहती है ।।
जिस दुनिया में तू अब रहती है ।।
by- अनुज प्रकाश गौतम
No comments:
Post a Comment